दून रेलवे स्टेशन के निर्माण कार्यों की पोल खुलने लग गई है। नवनिर्मित शेड जगह-जगह से टपक रहा है। वॉशिंग लाइन की स्थिति पहले से भी बदतर हो गई है। इनके अलावा स्टेशन पर सिग्नल, शंटिंग और अन्य कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जबकि यार्ड री-मॉडलिंग और प्लेटफार्म विस्तार के लिए पिछले साल 10 नवंबर से तीन महीने के लिए ट्रैफिक ब्लॉक किया था। इस दौरान यात्रियों को तो परेशानी उठानी ही पड़ी रेलवे को भी करीब साढ़े 13 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। बावजूद इसके निर्माण कार्यों की यह हालत है।
ट्रेनों की आवाजाही फिर भी शेड नहीं
नए यात्री शेड सही तरीके से नहीं लगाए गए हैं। बारिश का पानी टपक रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत तीन नंबर प्लेटफार्म पर हो रही है। यहां एक छोर से दूसरे छोर तक शेड अभी लगा ही नहीं है। कुछ छोटे-छोटे शेड बनाए गए हैं। जबकि इस प्लेटफार्म पर ट्रेनों की आवाजाही लगातार हो रही है। लेकिन शेड न होने से यात्री परेशान हैं।
वॉशिंग लाइन में कर्मी परेशान
यार्ड री-मॉडलिंग के बाद वाॅशिंग लाइन की स्थिति और खराब हो गई है। वॉशिंग लाइन में मेंटेनेंस में भी दिक्कत आ रही है। पानी की निकासी सही तरीके से नहीं हो रही है। इससे रेलकर्मियों को मेंटेनेंस करने में दिक्कत हो रही है। इसको लेकर रेलवेकर्मियों की यूनियन ने स्टेशन निदेशक को भी सूचित किया है। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
जबकि यार्ड री-मॉडलिंग और प्लेटफार्म विस्तार के लिए पिछले साल 10 नवंबर से तीन महीने के लिए ट्रैफिक ब्लॉक किया था। इस दौरान यात्रियों को तो परेशानी उठानी ही पड़ी रेलवे को भी करीब साढ़े 13 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। बावजूद इसके निर्माण कार्यों की यह हालत है।
ट्रेनों की आवाजाही फिर भी शेड नहीं
नए यात्री शेड सही तरीके से नहीं लगाए गए हैं। बारिश का पानी टपक रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत तीन नंबर प्लेटफार्म पर हो रही है। यहां एक छोर से दूसरे छोर तक शेड अभी लगा ही नहीं है। कुछ छोटे-छोटे शेड बनाए गए हैं। जबकि इस प्लेटफार्म पर ट्रेनों की आवाजाही लगातार हो रही है। लेकिन शेड न होने से यात्री परेशान हैं।
वॉशिंग लाइन में कर्मी परेशान
यार्ड री-मॉडलिंग के बाद वाॅशिंग लाइन की स्थिति और खराब हो गई है। वॉशिंग लाइन में मेंटेनेंस में भी दिक्कत आ रही है। पानी की निकासी सही तरीके से नहीं हो रही है। इससे रेलकर्मियों को मेंटेनेंस करने में दिक्कत हो रही है। इसको लेकर रेलवेकर्मियों की यूनियन ने स्टेशन निदेशक को भी सूचित किया है। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
सिक लाइन की तरफ पलटा हायड्रा
लक्कड़ मंडी की तरफ सिक लाइन पर बृहस्पतिवार को हायड्रा पलट गया। ट्रॉलियों को सिक लाइन में मेंटेनेंस के लिए लाने-जाने के लिए हायड्रा का प्रयोग किया जाता है। बताया जा रहा है केबल के लिए खुदाई चलने की वजह से जमीन धंसी हुई थी। उसमें पहिया जाने से हायड्रा पलट गया।
स्टेशन पर तकनीकी दिक्कत बहुत ज्यादा आ रही है। तीन महीने तक स्टेशन बंद रखा गया। इसके बावजूद व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं किया गया। रेलकर्मियों के साथ ही यात्रियों को भी दिक्कत हो रही है।
-राजेंद्र गुसाई, शाखा सचिव नरमू
डीआरएम ने वॉशिंग लाइन दोबारा बनाने का आश्वासन दिया था। इसकी स्थिति मेंटेनेंस लायक ही नहीं है। वॉशिंग लाइन में दो कोच की लंबाई बढ़ाने से आगे ऊंचा हो गया है। जबकि पीछे से नीचे रह गया है। इससे ड्रेनेज सिस्टम पहले से ज्यादा खराब हो गया है। मेंटेनेंस में दिक्कत आ रही है।
-जीके श्रीवास्तव, शाखा सचिव उरमू
रेलवे स्टेशन पर नया-नया काम हुआ है। कुछ जो दिक्कतें रह गई हैं उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। रेलकर्मियों की यूनियन द्वारा जो समस्याएं बताई हैं, उन्हें भी दूर किया जा रहा है।
-गणेश चंद ठाकुर, निदेशक, दून स्टेशन
स्टेशन पर तकनीकी दिक्कत बहुत ज्यादा आ रही है। तीन महीने तक स्टेशन बंद रखा गया। इसके बावजूद व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं किया गया। रेलकर्मियों के साथ ही यात्रियों को भी दिक्कत हो रही है।
-राजेंद्र गुसाई, शाखा सचिव नरमू
डीआरएम ने वॉशिंग लाइन दोबारा बनाने का आश्वासन दिया था। इसकी स्थिति मेंटेनेंस लायक ही नहीं है। वॉशिंग लाइन में दो कोच की लंबाई बढ़ाने से आगे ऊंचा हो गया है। जबकि पीछे से नीचे रह गया है। इससे ड्रेनेज सिस्टम पहले से ज्यादा खराब हो गया है। मेंटेनेंस में दिक्कत आ रही है।
-जीके श्रीवास्तव, शाखा सचिव उरमू
रेलवे स्टेशन पर नया-नया काम हुआ है। कुछ जो दिक्कतें रह गई हैं उन्हें दुरुस्त किया जा रहा है। रेलकर्मियों की यूनियन द्वारा जो समस्याएं बताई हैं, उन्हें भी दूर किया जा रहा है।
-गणेश चंद ठाकुर, निदेशक, दून स्टेशन